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तीन तलाक मामले में राज्यसभा ने बीजेपी को दिया झटका

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Aug 10 2018 3:59PM
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नई दिल्ली. संशोधित तीन तलाक बिल राज्यसभा में पेश नहीं हो सका. इससे बीजेपी सरकार को बड़ा झटका लगा है. उम्मीद थी कि अगर आज यह बिल सरकार पेश नहीं कर पाएगी तो संसद के सत्र को एक दिन के लिए बढ़ाया जा सकता है, लेकिन सरकार ने विपक्ष के विरोध को देखते हुए इसे मानसून सत्र में पेश नहीं करने का फैसला किया है.

माना यह भी जा रहा था कि सरकार ट्रिपल तलाक पर अध्यादेश ला सकती है, लेकिन सरकार ने सभी कयासों पर विराम लगाते हुए इसे संसद के आगामी सत्र में पेश करने का फैसला किया है. बता दें कि सरकार ने ट्रिपल तलाक मामले में कुछ अहम संशोधन किये हैं. जिसमें एक साथ तीन तलाक जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है. इस मामले में कोर्ट की सहमति से दोनों पक्ष समझौता कर सकते हैं.

सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि केन्द्र सरकार ट्रिपल तलाक बिल को संसद के दोनों सदनों से पारित करवाने के लिए मॉनसून सत्र एक दिन के लिए बढ़ा भी सकती है. यानी बिल पास न होने की स्थिति में एक दिन के लिए संसद का सत्र बढ़ सकता है. इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि केन्द्र सरकार किसी तरह इस बिल को पारित कराना चाहती है. ट्रिपल तलाक बिल पारित न होने की स्थिति में केन्द्र सरकार के पास प्लान बी भी है. इसके मुताबिक, केन्द्र सरकार ट्रिपल तलाक पर अध्यादेश ला सकती है या फिर आपातकालीन कार्यकारी आदेश लाएगी.

आज राज्यसभा में संशोधन के साथ तीन तलाक बिल पेश किया गया, जिसे लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों की उपस्थिति को लेकर व्हिप जारी किया था, भाजपा के वरिष्ठ नेता रणनीति के लिए सुबह से ही संसद में उपस्थित रहे. इस मीटिंग में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, मुख्तार अब्बास नकवी और कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं.

राज्यसभा में विपक्षी पार्टियों के राफेल डील मामले में हंगामे के बीच संसद दोपहर 2.30 बजे तक स्थगित कर दी गई. आज उपसभापति के रूप में हरिवंश का राज्यसभा में पहला और मानसून सत्र का आखिरी दिन है. संसद में तीन तलाक से लेकर राफेल डील मामले पर कांग्रेस पार्टी भाजपा को घेरने में जुटी है. तीन तलाक मुद्दे पर सोनिया गांधी ने कहा कि हमारी पार्टी की पोजीशन इस मामले में एकदम साफ है और हम इस मामले पर और कुछ नहीं कहेंगे.

बृहस्पतिवार को  केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष से तीन तलाक बिल को पारित कराए जाने की अपील करते हुए कहा था कि अगर सोनिया गांधी, मायावती और ममता बनर्जी लैंगिक समानता चाहती हैं तो उन्हें बिल का विरोध नहीं करना चाहिए. कैबिनेट ने एक साथ तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत संबंधी बिल में विपक्ष की मांग मानते हुए उस संशोधन की मंजूरी दे दी है. जिसके तहत आरोपित जमानत के हकदार होंगे. अब इस बिल के कानून बनने के बाद तीन तलाक का आरोपित मजिस्ट्रेट से जमानत ले सकता है. हालांकि एक साथ तीन तलाक गैर जमानती अपराध की श्रेणी में ही रहेगा. बिल में आरोपित को अपराध साबित हो जाने के बाद तीन सील की सजा का प्रावधान है.


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