आप यहां हैं : होम» राज्य

संत समाज भी है गंगा की बर्बादी का ज़िम्मेदार

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Nov 30 2018 4:34PM
ganga_20181130163418.jpg

हिमांशु चौहान

हरिद्वार. गंगा को भागीरथ अपने पूर्वजों का उद्धार करने के लिए पृथ्वी पर लाए थे. मगर आज खुद मां गंगा अपने उद्धार के लिए तरस रही हैं, क्योंकि मां गंगा पर अब संकट मंडरा रहा है. गंगा में आए दिन शवों को विसर्जित किया जा रहा है. वहीं गंगा को स्वच्छ करने को लेकर संत समाज भी बड़े-बड़े दावे करता रहा है.

साधु संत भी गंगा के अंदर ही संतों को जल समाधि दे देते हैं. कई गंगा घाट ऐसे हैं जहां पर लोग और साधु संत शवों को विसर्जित करते हैं और यह शव इन्हीं घाटों पर पड़े रहते हैं. वैज्ञानिक भी गंगा में शव डालने को लेकर गंगा को प्रदूषित होने की बात कर रहे हैं. गंगा की स्वच्छता को लेकर लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे रामेश्वर का कहना है कि गंगा करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र है. मां गंगा में देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु मां गंगा में स्नान करने के लिए हरिद्वार आते हैं. मगर आज मां गंगा का हरिद्वार में बुरा हाल हो रहा है, क्योंकि गंगा के अंदर ही काफी शव पड़े हुए हैं, जिससे मां गंगा प्रदूषित हो रही हैं.

मां गंगा पर संकट मंडरा रहा है जो मां गंगा लोगों का कल्याण करती है. गंगा को मोक्ष दायिनी कहा जाता है. इसी कामना के साथ आए दिन गंगा में शवों को बिना यह जाने विसर्जित कर दिया जाता है कि गंगा पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा. वैज्ञानिक भी गंगा में शव डालने को लेकर गंगा को प्रदूषित होने की बात कर रहे हैं. अब माँ गंगा को भी भागीरथ की जरूरत है.

गंगा की स्वच्छता और निर्मलता को लेकर लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे रामेश्वर गॉड का कहना है कि गंगा करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र है. मां गंगा में देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु मां गंगा में स्नान करने के लिए हरिद्वार आते हैं. मगर आज मां गंगा का हरिद्वार में बुरा हाल हो रहा है, क्योंकि गंगा के अंदर ही काफी शव पड़े हुए हैं. जिससे मां गंगा प्रदूषित हो रही है. संत समाज को गंगा में जल समाधि देना बंद करना पड़ेगा, तभी मां गंगा स्वच्छ हो सकेगी.

साधु संत और तमाम राजनेता गंगा को लेकर बड़ी बड़ी बातें करते हैं लेकिन गंगा की हकीकत गंगा घाटों पड़े इन शवों को देखकर आसानी से जानी जा सकती है.

गंगा में संतो जल समाधि देने का हरिद्वार के कुछ संत भी विरोध कर रहे हैं. अखाड़ा परिषद के पूर्व प्रवक्ता बाबा हठयोगी का कहना है कि परंपरा के नाम पर कुछ संत ही अपने साथी संतों को जल समाधि देते हैं. जहां देश में एक और पत्थर की मूर्तियों को भी जीती जागती भगवान बना देती है. वहीं गंगा को यह लोग प्रदूषित कर रहे हैं. दो अखाड़ों को छोड़ तमाम अखाड़ों में अग्नि संस्कार का विधान है. इसके बावजूद लोग इसका पालन नहीं करते उन्होंने कहा कि संत समाज चाहे तो इस पर एक बड़ी पहल कर सकता है लेकिन वह इस पर अमल नहीं करते.

संतों का कहना है बड़े-बड़े आश्रमों में रहने वाले संतों को जल समाधि नहीं दी जाती, क्योंकि उनके पास भू समाधि देने की जगह होती है मगर जो छोटे संत होते हैं उनके पास इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं होती है. इसलिए उनको जल समाधि दी जाती है. इसलिए या तो सरकार इस तरह व्यवस्था करे या फिर सभी अखाड़े को व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि इन संतों को भी भू समाधि दी जा सके.

वैज्ञानिक भी मानते हैं कि गंगा के प्रदूषित होने का एक बड़ा कारण शवों को गंगा में विसर्जित करना है. वैज्ञानिकों का कहना है गंगा में शव को डालने से काफी नुकसान होता है, क्योंकि शव गंगा में पड़े रहने से सड़ जाता है. जिसको जानवर खाते हैं. यह पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंचाता है और जल को बहुत प्रदूषित करता है, इससे कई तरह की बीमारियां उत्पन्न होती हैं. गंगा में पूरी तरीके से शव को डालना बंद कर देना चाहिए. इसकी वजह से गंगा को काफी नुकसान होता है.

वैज्ञानिकों का भी मानना है मां गंगा मैं डाले जाने वाले शवों से मां गंगा काफी अशुद्ध हो रही है अगर संत समाज यह पहल करता है तो माँ गंगा कुछ शुद्ध हो सकेगी. नहीं तो एक दिन ऐसा भी आएगा की गंगा में स्नान तो दूर की बात है कोई गंगा में आचमन भी करने से घबरायेगा.


देश-दुनिया की अन्य खबरों और लगातार अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं।