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सिद्धार्थ ने जीता राष्ट्रीय टेनिस फेनेस्टा ओपन

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 13 2018 12:00PM
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वाराणसी. सिद्धार्थ विश्वकर्मा ने भारतीय टेनिस में जोरदार दस्तक देते हुए अपने खेल का लोहा मनवाया है. वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के गांव घौषाबाद निवासी इस बाएं हाथ के खिलाड़ी ने बीते शनिवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय टेनिस फेनेस्टा ओपन में उलटफेर करते हुए खिताब अपने नाम किया. यही नहीं सिद्धार्थ विश्वकर्मा एशिया से सबसे तेज गति की सर्विस करने वाले इस खिलाड़ी ने इस खिताब को जीतने के बाद डेविस कप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की दावेदारी को काफी मजबूत कर दिया है.

वाराणसी के रहने वाले 24 वर्षीय सिद्धार्थ विश्वकर्मा ने नई दिल्ली में कुछ ऐसा कर दिखाया जिस पर शायद ही कोई विश्वास कर सके. जी हां सिद्धार्थ विश्वकर्मा ने टेनिस के शीर्ष वरीयता अर्जुन खड़े को हराकर फेनेस्टा ओपन नेशनल चैंपियनशिप में एकल खिताब पर अपना कब्जा किया. एकल खिताब में सिद्धार्थ विश्वकर्मा ने एशिया में 358 रैंकिंग रखने वाले अर्जुन खड़े को हराया जबकि सिद्धार्थ विश्वकर्मा की रैंकिंग 1221 है सिद्धार्थ विश्वकर्मा का परफॉर्मेंस देख सभी हैरान रह गए.

सिद्धार्थ वर्मा की जीत के साथी उनकी रैंकिंग में भी सुधार हुआ है. सिद्धार्थ विश्वकर्मा की जीत के बाद सबसे ज्यादा खुशी उनके परिवार के लोगों को है क्योंकि सिद्धार्थ विश्वकर्मा एक निम्न परिवार से आते हैं और जिन परिस्थितियों में परिवार वालों ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया. सिद्धार्थ विश्वकर्मा को उस मुकाम तक पहुंचता देख परिवार में खुशी का माहौल है.

अपनी सर्विस से सबसे चौंकाने वाले सिद्धार्थ विश्वकर्मा एशिया के सबसे तेज सर्विस करने वाले टेनिस खिलाड़ी हैं और उनकी इस जीत के बाद उनके पिता ने सिद्धार्थ के बारे में बताया कि सिद्धार्थ बचपन से ही टेनिस का शौकीन रहा और इसकी रुचि भी इस खेल में काफी थी. इसको लेकर परिवार के सभी लोगों ने इसे खेलने में सहयोग प्रदान किया.

सिद्धार्थ के परिवार में माता-पिता के अलावा उनकी एक बहन है. जिनका विवाह हो चुका है सिद्धार्थ के पिता ने बताया कि सिद्धार्थ को बचपन में स्वास्थ्य संबंधित तकलीफ थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें ज्यादा प्रेशराइज करने की सलाह दी थी, और सिद्धार्थ को सबसे ज्यादा पसंद टेनिस था इस वजह से किसी ने इस खेल को न खेलने के लिए उससे नहीं कहा, सभी ने उसका सहयोग किया जिसके बाद धीरे-धीरे सिद्धार्थ भी टेनिस में परिपक्व हो गया.

सिद्धार्थ के पिता एक निम्न परिवार से आते हैं. सिद्धार्थ के पिता ने अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि सिद्धार्थ को टेनिस खिलाने के लिए उनको किसी और की सहायता नहीं मिलती थी. वह अपना पेट काटकर और आमदनी का पैसा बचाकर किसी तरह सिद्धार्थ को इस खेल के लिए तैयार करते थे. पिता ने बताया कि उनको उस समय तकलीफ होती थी जब वह उसे लेकर बाहर जाते थे और कम पैसों में सरवाइव करते थे.


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