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इस तरह खुले में शौच से मुक्त हो रहा है सिद्धार्थनगर

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 20 2018 5:01PM
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सिद्धार्थनगर. प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के सपने को जिम्मेदार ही पलीता लगाने पर तुले हैं. हालत यह है कि जिस गांव की आबादी 6 सौ घर से अधिक है उस गांव में सिर्फ 120 लोगों के लिये ही शौचालय स्वीकृत किया गया है. ऐसे में गाँव को खुले में शौच मुक्त बनाने का प्रधानमन्त्री का सपना कैसे पूरा होगा इस पर भी सवालिया निशान लग गया है.

ताजा मामला विकास खण्ड शोहरतगढ़ की ग्राम पंचायत पल्टादेवी का है. जहाँ लोगों को शौचालय उपलब्ध कराने के सरकारी मिशन को ऐसा झटका लगा है कि गांव की 75 फीसदी से अधिक आबादी आज भी खुले में शौच करने को विवश है. इस विषय में ग्राम प्रधान से बात करने का प्रयास किया तो कैमरे के सामने कुछ बोलने से इनकार कर दिया लेकिन बिना कैमरे के यह कहा कि अधिकारी नहीं दे रहे हैं तो इसमें मैं क्या कर सकता हूँ.

वहीं जब ग्रामीणों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हम सबके जो भी शौचालय बने रहे हैं उनका भी आज चार महीने से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि ग्राम प्रधान द्वारा अभी पहली किस्त के रूप में किसी को 5 हजार तो किसी को 6 हजार नकद दे दिया गया है और 4 माह बीत जाने के बाद भी हमें दूसरी क़िस्त का धनराशि नहीं मिली है. इससे गांव वालों में बहुत गुस्सा दिखाई दे रहा है. उनका कहना है कि जिस तरह सरकारी अफसर शौचालय का लाभ दे रहे हैं उससे देश को स्वच्छ बनाने का प्रधानमन्त्री का सपना मुंगेरी लाल के हसीन सपने की तरह बनने के जैसा ही है.

जब जिला पंचायत राज अधिकारी से बात की गई तो पता चला कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत जनपद शौचालय निर्माण कि दूसरी क़िस्त सितम्बर में ही जारी हो गई है. अब सोचने वाली बात यह है कि लाभार्थियों को दूसरी किश्त का पैसा नहीं मिला तो वह पैसा गया कहां? क्या प्रधान और सचिव ग्रामीणों का पैसा डकार गये हैं. यह जांच का विषय है.


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