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सुप्रीम कोर्ट : नमाज़ मस्जिद का हिस्सा नहीं

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Sep 27 2018 5:10PM
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नई दिल्ली. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि नमाज़ मस्जिद का हिस्सा नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के इस बहुमत के फैसले में कहा गया कि इस फैसले को वृहद पीठ के समक्ष नहीं भेजा जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अयोध्या के मुख्य मामले की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है. देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि वह 29 अक्टूबर से अयोध्या मामले की सुनवाई विषय के गुण और दोष के आधार पर करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के अपने फैसले को बरकरार रखते हुए अपने इस फैसले में कहा कि नमाज मस्जिद का हिस्सा नहीं है.

बाबरी मस्जिद मामले के मुख्य पैरोकार इकबाल अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने से पहले ही कहा था कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सुप्रीम कोर्ट नमाज़ और मस्जिद के सम्बन्ध पर क्या फैसला सुनाता है लेकिन धार्मिक लिहाज़ से मस्जिद में नमाज़ पढ़ने का सवाब कहीं ज्यादा होता है.

नमाज़ और मस्जिद के सम्बन्ध पर आज हुए फैसले से जस्टिस नजीर सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा कि मैं अपने साथी जजों की राय से सहमत नहीं हूं. जस्टिस नजीर ने कहा कि मामले को बड़ी बेंच को सौंपा जाना चाहिए था. बड़ी पीठ को यह तय करने की जरूरत है कि आवश्यक धार्मिक प्रैक्टिस क्या है.

जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि सभी धर्मों और धार्मिक स्थानों को समान सम्मान देने की ज़रुरत है. जस्टिस भूषण ने कहा कि हर फैसला अलग परिस्थितिथों में होता है. पिछले फैसले के संदर्भ को भी समझना होगा.


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