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निशंक से नहीं माने स्वामी सानंद, अनशन जारी

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 10 2018 2:26PM
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हरिद्वार. सांसद रमेश पोखरियाल निशंक कल रात दोबारा गंगा की अविरलता निर्मलता और स्वच्छ्ता के लिए पीएमओ से जारी अधि सूची लेकर मातृ सदन स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद को मनाने पहुंचे. जहां मातृ सदन में पिछले 111 दिनों से अनशन पर बैठे स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने अधिसूचना के आधार पर अनशन समाप्त करने से साफ तौर पर मना कर दिया. इस दौरान निशंक और सानंद के बीच करीब दो घण्टे तक वार्ता चली, मगर बेअसर साबित हुई.

यही नहीं स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने पहले ही अपनी आमरण अनशन रूपी तपस्या के साथ-साथ जल का त्याग भी कर दिया है. आमरण अनशन पर बैठे स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद को मनाने और स्वामी सानन्द से अनशन समाप्ति का आग्रह करने पहुंचे सांसद निशंक के हाथ निराशा ही लगी, और सांसद निशंक को खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा. स्वामी सानंद  ने अधिसूची के आधार पर अनशन समाप्त करने से साफ मना कर दिया. हालांकि सांसद निशंक का कहना है कि यह अधिसूची अपने आप में अद्भुत है और भारत सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है.

प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्र सरकार का भी लक्ष्य स्वच्छ गंगा है, मगर स्वामी जी ने अपनी और मांगें इसमें जोड़ने की मांग की है. इन मांगों को केन्द्र स्तर पर पूरी करने का प्रयास किया जाएगा. स्वामी जी के सानिध्य की अभी हमे बहुत ज्यादा जरूरत है, इसमें मेरे द्वारा व्यक्तिगत कोशिश की जा रही है.

स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने रात के समय तो कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया मगर मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानन्द का साफ तौर पर कहना है कि स्वामी सानंद ने दोपहर से ही जल का त्याग कर दिया है. निशंक के आग्रह को खारिज नहीं किया गया है. जो मुख्य चार मांगे हैं उनमें से भागीरथी अलकनंदा आदि नदियों पर प्रस्तावित बांध की परियोजना तुरंत रोकी जाए, गंगा में खनन पूर्णता बंद किया जाए और गंगा के गंगात्व की रक्षा करेंगे. अगर यह तीनों बिंदु अधिसूची में शामिल किए जाते हैं तो ही स्वामी जी अब अनशन समाप्त कर जल ग्रहण करेंगे.

वहीं केन्द्र सरकार की अधिसूची को खारिज करते हुए स्वामी शिवानंद ने इसे केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मंत्रालय की करतूत बताया है. सांसद निशंक द्वारा इस मामले में पूरी कोशिश की जा रही है कि वह केन्द्र सरकार और स्वामी सानंद में तालमेल बिठा कर किसी तरह आमरण अनशन को समाप्त करवा सकें. इसके लिए उनके द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, अब देखने वाली बात यह होगी कि कब तक स्वामी सानंद की मांगों को केन्द्र सरकार कितनी जल्दी अधिसूची में शामिल करती है और कितनी जल्दी सांसद निशंक अपने प्रयासों में सफल होते हैं.


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