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हार की समीक्षा के दौरान आपस में ही खिंच गई तलवारें

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Jun 9 2019 5:57PM
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आगरा. जिले की फतेहपुर सीकरी और आगरा सुरक्षित लोकसभा सीट पर बसपा प्रत्याशियों को मिली हार के बाद समीक्षा बैठक करने पहुंचे नगीना से नवनिर्वाचित बसपा सांसद गिरीश चंद के सामने केवल दो दिन के लिए बनाये गए  जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह को पार्टी हाई कमान द्वारा हटाए जाने का दर्द बयां किया गया और आपस में जमकर तकरार भी हुई.

मंडल कोर्डिनेटर बनाये गए ओ. पी. बघेल और तत्कालीन जिलाअध्यक्ष विक्रम सिंह बसपा सांसद और आगरा प्रभारी गिरीश चंद की मौजूदगी में आमने सामने आ गए और बात बढ़कर खींचतान तक जा पहुंची. अंदर खाने चल रही तकरार का पूरा मामला हमारे कैमरे में कैद हो गया. बसपा हाई कमान ने आगरा में मिली हार के कारण जिला अध्यक्ष को हटाकर विक्रम सिंह को पार्टी का दायित्व सौंपा था, लेकिन दो दिन बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने विक्रम सिंह को जिला अध्यक्ष पद से हटा दिया और संतोष आनंद को जिला अध्यक्ष बना दिया.

आज नगीना के सांसद गिरीश चंद सर्किट हाउस में पार्टी पदाधिकारियों के साथ हार की समीक्षा कर रहे थे, तभी तत्कालीन जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह ने हार का ठीकरा मंडल कोआर्डिनेटर ओ. पी. बघेल पर फोड़ते हुए भाजपा के एस.पी. सिंह बघेल को जिताने का आरोप लगा दिया. जैसे ही ये आरोप लगाया गया. ओ.पी. बघेल भी सुबूत दिखाने की बात कहने लगे. इस पर बात बढ़ गयी और तत्कालीन जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह और उनके समर्थक उत्तेजित हो गए.

तत्कालीन बसपा जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह ने ओ.पी. बघेल पर भाजपा के एसपी सिंह बघेल के पक्ष में कार्य करने और वोट दिलाने के आरोप लगा लगाना शुरू कर दिया. विक्रम सिंह और ओ.पी. बघेल अपने अपने समर्थकों के साथ बाहें तानकर खड़े हो गए. बीच में सांसद गिरीश चंद पहले मूक दर्शक बन कर सारा ड्रामा देखते रहे बाद में दोनों पक्षों को शांत कराकर उनकी बात सुनी गयी.

इस मामले में जब बसपा सांसद गिरीश चंद से पूछा गया तो बात को घुमा कर सब बातों से इनकार कर गए. यहीं उन्होंने अलीगढ़ के टप्पल में मासूम की हत्या के मामले में कहा है कि जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है कानून व्यवस्था ख़त्म हो चुकी है और अराजकता का माहौल बना हुआ है.

कुछ ऐसा ही हाल तत्कालीन जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह था,उनसे जब समीक्षा के दौरान हुई तीखी नौक झोंक के बारे में पूछा गया ये भी सब बातों से इनकार कर गए.

बहरहाल बसपा के नेता भले ही तकरार की बातों से इनकार करें लेकिन तस्वीरें कभी झूठ नहीं बोलती हैं. बसपा बाहर से भले ही एक होने का दावा करती हो लेकिन अंदर खाने पार्टी में बड़े स्तर से लेकर जिला स्तर तक सब कुछ ठीक ठाक नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में जहां बसपा गठबंधन का साथ छोड़कर अब प्रदेश में होने वाले उप चुनाव में अकेले उतरने का दम भर रही है लेकिन पार्टी में चल रहे अंदरखाने विरोध से बसपा कैसे निजात पायेगी, ये एक बड़ा सवाल है.


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