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नवरात्र के दूसरे दिन हुई माँ के तीसरे स्वरूप की आराधना

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 11 2018 12:52PM
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वाराणसी. शारदीय नवरात्र के पहले दिन प्रतिपदा और द्वितीय तिथि एक साथ पड़ने की वजह से जहां माँ शैलपुत्री और ब्रम्चारिणी देवी के दर्शन एक ही दिन हुए तो वहीं आज दूसरे दिन माँ के तीसरे स्वरूप देवी चंद्रघंटा के दर्शन-पूजन का विधान है. इन्हें चंद्रघंटा देवी भी कहा जाता है.

वाराणसी शहर के ठठेरी बाजार के पास माँ चंद्रघंटा का मन्दिर है. देवी के इस स्वरूप की आराधना में ऐ कारी सृष्टि रूपाय ही कारी प्रति पालिका-कली कारी काम रूपिन्ये बीजरूपे नमोस्तुते. मन्त्र का विशेष महत्व है. इनके पूजन का समय सूर्योदय से शुरू होता है. तभी से दर्शनार्थियों की बड़ी संख्या में भीड़ जमा होने लगती है.

मान्यता है कि जब असुरों के बढ़ते प्रभाव से देवता त्रस्त हो गये तब देवी चंद्रघंटा रूप में अवतरित हुईं. असुरों का संहार कर देवी ने देवताओं को संकट से मुक्त कराया.

माँ के दर्शन के बारे में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक श्रीकांत महाराज ने बताया कि भगवती चंद्रघंटा का रूप सौम्य रूप है. माँ के दर्शनमात्र से मनुष्य के अभीष्ट की सिद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. माँ के सहज भाव से दर्शन से मनुष्य जन्म जमांतर के पाप श्राप से मुक्त होकर माँ की कृपा पाते हैं. यहाँ माँ चंद्रघंटा का मंदिर बहुत प्राचीन है. श्रीकांत महाराज ने बताया कि यह बाबा काशी विश्वनाथ की धरती है, लेकिन होता वही है जो माँ चाहती हैं, इसलिए मनुष्य को माँ का दर्शन कर कृतार्थ होना चाहिए.


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