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यहाँ देवी दिन में तीन रूप बदलती हैं

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 18 2018 9:59AM
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कानपुर. कानपुर देहात में प्राचीन मुक्ता देवी मंदिर में नवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है. कहा जाता है कि यहां देवी दिन में 3 रूप बदलती हैं. सुबह बाल अवस्था दोपहर युवा अवस्था और रात को वृद्ध अवस्था. लोग बताते हैं कि मुक्ता देवी मंदिर लगभग 5 हज़ार साल पुराना है और जमुना नदी के किनारे बने मंदिर में दस्यु सुंदरी फूलन देवी और डाकू विक्रम मल्लाह माथा टेकने आते थे. खास बात यह है कि मंदिर परिसर में एक ज़माने से चूड़ी बेच रही मुस्लिम बुज़ुर्ग महिला ने मंदिर में 3 बीघा जमीन दान दी थी जो साम्प्रादायिक सौहार्द की मिसाल है.

कानपुर देहात के मूसानगर इलाके में जमुना नदी के किनारे बने प्राचीन मुक्ता देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था है कि इस दरबार में हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि यहां भक्त प्रदेश से ही नहीं बल्कि देश के कोने कोने से आते हैं. बताया जाता है कि यह सिद्ध पीठ है. इसी वजह से यहां हर मनोकामना पूरी होती है.

जानकार बताते हैं कि मंदिर परिसर में लगी प्रतिमाओं को कई दशक पहले चोरी करने की कोशिश की गयी लेकिन बाद में चोर प्रतिमाओं को वापस मंदिर में लाकर रख गए और क्षमा प्रार्थना कर चले गए. मंदिर के पुजारी बताते है कि इस बात का किसी को नहीं पता कि मंदिर कितना पुराना है, लेकिन हाल ही में पुरातत्व विभाग की टीम आयी थी और उसके सर्वेक्षण में यह जानकारी हुई की मंदिर लगभग 5 हज़ार साल पुराना है. मंदिर परिसर में कई दुकानें भी हैं जिसमें प्रसाद का सामान बेचा जाता है.

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि जमुना किनारे बने प्राचीन मुक्ता देवी मंदिर में दस्यु सुंदरी फूलन देवी डाकू विक्रम मल्लाह सहित बीहड़ में रहने वाले तमाम डाकू भी माथा टेकने आते थे और माता का आशीर्वाद लेकर चले जाते थे लेकिन कभी डाकुओं ने किसी को हानि नहीं पहुंचाई.

मंदिर परिसर में चूड़ी ओर श्रृंगार का सामान बेच कर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाली मुस्लिम महिला ज़ुबैदा कई दशक से मंदिर में ही श्रृंगार का सामान बेच रही है. मंदिर में ज़ुबैदा ने अपनी 3 बीघा जमीन दान कर दी थी और इसकी वजह भी सुन लीजिए ज़ुबैदा ने इस वजह से मंदिर में जगह दान दी थी कि भविष्य में उसके रिश्तेदार नातेदार विवाद न करें. दंगा फसाद कुछ हो लेकिन ज़ुबैदा को डर नहीं लगता. वह रोज़ाना ऐसे ही मंदिर के सामने दुकान पर बैठती हैं और यहां के लोग उन्हें प्यार व स्नेह करते हैं जो यकीनन हिन्दू मुस्लिम सौहार्द की मिसाल है.


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