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वरुण का संकट खत्म!

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Feb 7 2019 7:14PM
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राजेंद्र कुमार

प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में उतरी और भाई वरुण गांधी का संकट खत्म हो गया. वरुण गांधी सुल्तानपुर से बीजेपी के सांसद हैं. बीते डेढ़ साल से वरुण गांधी का अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से छत्तीस का आंकड़ा है. गुजरात से जुड़े ये नेताजी वरुण से खासे खफा हैं. पीएम के नजदीकी ये नेताजी मानते हैं कि वरुण गांधी पार्टी की नीतियों के खिलाफ न सिर्फ बोलते हैं, बल्कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो भी नहीं देते. इसके बाद भी वरुण ने बीजेपी के इस प्रमुख नेता को तवज्जो नहीं दी. 

तो सुल्तानपुर संसदीय सीट से वरुण के स्थान पर किसी और को चुनाव लड़ाने का संकेत वरुण से खफा नेताजी ने दे दिया. वरुण को भी इसकी जानकारी हुई. फिर भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से वरुण मिलने नहीं गए. और न ही अपनी मां मेनका गांधी जो मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं को इस मामले में पैरवी करने को कहा. वरुण के इस रुख के कारण यह हवा उड़ी कि यूपी की पीलीभीत से सांसद रहे और वर्तमान में सुल्तानपुर से बीजेपी के सांसद वरुण जल्दी ही बीजेपी से नाता तोड़ लेंगे.

ऐसी अटकलों ने तब और तेजी पकड़ ली जब प्रियंका गांधी को कांग्रेस का महासचिव बनाए जाने का ऐलान हो गया. तभी से यह कहा जाने लगा कि वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं, क्योंकि प्रियंका गांधी अपने चचेरे भाई वरुण को बहुत मानती हैं. वरुण भी अपनी बहन प्रियंका का बहुत आदर करते हैं और उनके कहे को कभी नहीं टालते. भाई-बहन के इस रिश्ते को लेकर जब वरुण गांधी के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर ज्यादा अटकलें लगने लगीं तो बीते दिनों वरुण गांधी केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिले, और अपने बारे में चल रही अटकलों के बारे में उनको बताया. 

चर्चा है कि राजनाथ सिंह और वरुण गांधी की मुलाकात की भनक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को हुई. तो वरुण गांधी के बीजेपी में होने से हो रहे लाभ और कांग्रेस में जाने से होने वाले घाटे पर विचार-विमर्श हुआ. इस बैठक में एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने वरुण से खफा नेताजी को बताया कि वरुण ने 2004 में बीजेपी ज्वाइन की थी. लगातार दो बार से वह सांसद हैं. देश भर में अखबारों में वरुण के लिखे लेख छपते हैं और उनकी छवि एक सुलझे हुए सांसद की है. पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी उन्हें बहुत मानते हैं. इसलिए वरुण गांधी से टकराव छोड़ देना ही उचित होगा. यदि वरुण से टकराव लिया जाएगा तो चुनाव के ठीक पहले इसका राजनीतिक संदेश पार्टी के लिए नुकसानदेह होगा.

इसलिए जरूरी है कि वरुण गांधी को खुश रखते हुए उन्हें किसी भी कीमत पर कांग्रेस में न जाने दिया जाए, क्योंकि यदि वरुण भी कांग्रेस में चले गए तो राहुल, वरुण और प्रियंका की तिकड़ी बीजेपी का खेल यूपी सहित समूचे देश में गड़बड़ा देगी. पार्टी के वरिष्ठ नेताजी के इस आंकलन पर वरुण से पंगा रखने वाले गुजराती नेताजी शांत हो गए हैं. अब वरुण यूपी की जिस भी सीट से चुनाव लड़ना चाहेंगे, वह उन्हें मिलेगी. यह संदेश वरुण गांधी को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से मिल गया है.


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